कल शायद वो ना रहे
या फिर ना रहो शायद तुम,
आज वो भी है और हो तुम भी
फिर करते किस बात का इंतज़ार हो तुम।
कह दो जो भी कहना है,
आज उनसे तुम।
कल फिर मलाल होगा और फिर
बुरा तुम्हारा हाल होगा,
जब वो कल तुमसे दूर चले जायेंगे।
कह दिया होता शायद हमने पहले,
फिर आप यही सोचते रह जायेंगे।
कल शायद वो ना रहे
या फिर ना रहो शायद तुम,
कह दो जो भी कहना है
आज उनसे तुम।
✍️ रीना कुमारी प्रजापत ✍️
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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