महीन जलकण
पवन पवन विचरित
निम्न तापमान में
होकर संघनित
जब,
पीपल के पत्तों पर
बैठ जाती हैं,
झूकी पत्तों से
मोतीवत ढूलती हुई
पर्णशीर्ष से विलग हो
पवन मार्ग में
झूलती हुई,
टप से गिर जाती है
खुली हुई कंधों पर,
तब,
शीतलाहट की तरंगें
डुला देतीं हैं
पूरे तन मन को,
स्तंभित हो जातें हैं,
समग्र तन के रोम रोम,
उभर आते हैं,
असंख्य सूक्ष्म दाने,
पूरे त्वचा क्षेत्र में,
संपूर्ण तन मन, जैसे
फिर से ऊर्जित हो
उठता है,
प्रकृति की इस अनमोल
अनुभूति को पाकर।।
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







