ना कर पा रही हुं मै
अपनी जिदंगी से दोस्ती
अपनी ही उलझनो से
उलझ कर रह गई हूं मै
ना पाने की उम्मीद ने
चुप करा दिया है
बांध आँखो पर पट्टी बंदी हुं मै
जला कर सपनो की झोली
बित रहा हर एक पल
जिदंगी से और रूकी हूं मै
अपनी ही बेडीयो मे,बंदकर
टुट कर रह गई हो ,जीद मेरी और मै


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







