हर रूप में जो ढल जाए ऐसी पानी-सी तुम सरल लगती हो,
मैंने ख़्वाबों में जिनको देखा था, हूबहू वही शकल लगती हो,
रंगो-रूप, आबो-ताब से तुम...
चलती फिरती इक मुकम्मल ग़ज़ल लगती हो..!
कमलकांत घिरी ✍️
(मनकी, लोरमी, मुंगेली, छत्तीसगढ़)

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
हर रूप में जो ढल जाए ऐसी पानी-सी तुम सरल लगती हो,
मैंने ख़्वाबों में जिनको देखा था, हूबहू वही शकल लगती हो,
रंगो-रूप, आबो-ताब से तुम...
चलती फिरती इक मुकम्मल ग़ज़ल लगती हो..!
कमलकांत घिरी ✍️
(मनकी, लोरमी, मुंगेली, छत्तीसगढ़)
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