न कोई देखेगा न चोरी समझा जायेगा जो मेरे साथ जायेगा
जो सभी को मिला ये है कि वह हमें नहीं मिला
कौन समझे ख़ुदको के क्या मिलना बाकी है
दिखता सबको उसको है मगर एक नहीं दिखता है
बहुत कुछ मिला है इंसान को शैतान को नहीं मगर
फिर भी दूसरे से छीनने में लगा है इन्सान में सब्र नहीं
जहां कुछ नहीं वहां शैतान नहीं जहां शैतान वहां हसद है
आदमी वो शैतान में फ़र्क इतना हम में हम है उसमे नहीं
लेने वाला शैतान या हाथ से देने का मर्तबा समझना होगा
हमारी समझ से कुछ नहीं जो मेरा है मेरे तहकीक में है
खाली आए ज़िंदगी में कुछ मिला जो कि साथ नहीं जायेगा
हम ले जायेंगे एक चीज़ जहान से जो जहान चीज़ नहीं है
न कोई देखेगा न चोरी समझा जायेगा जो मेरे साथ जायेगा
WASI AHMAD QADRI
WASI AHMAD ANSARI
Writer... Poet.... Thinker
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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