कक्षा में प्रवेश करने से पहले,
दरवाजे की चौखट पर,
उतार देता हूँ मैं अपनी सारी थकान,
भूल जाता हूँ घर-परिवार,
खुद की सारी मुश्किलें,
जैसे हर कदम हो मेरा कोई इम्तिहान।
वहाँ से ही यहाँ आया हूँ मैं,
समझता हूँ बच्चों की हर परेशानी,
इसलिए गौर से सुनता हूँ हर बात,
ताकि खोज सकूँ उसका कोई समाधान।
पढ़ाते समय जाने क्यों ये ऐसा करते हैं,
कभी बेवजह हँसते, कभी एकदम चुप रहते हैं,
कभी ये मुझसे, कभी मैं इनसे,
उलझते रहते हैं, होते रहते हैं परेशान।
हमारा रिश्ता है बड़ा ही निराला,
कभी डाँटता हूँ, कभी दुलारता हूँ,
मेरी डाँट में भी छिपा है प्यार,
और बच्चे इसी बात से हैं अनजान।
पढ़ाते-पढ़ाते खो सा जाता हूँ,
तरह-तरह की कहानियाँ सुनाता हूँ,
कहानियों में छिपी सीख को समझो,
ताकि बन सको एक सच्चे इंसान।
लगा के पर, सीखा दी उड़ने की कला,
अब उड़ो जी भरकर खुले आसमाँ में,
खूब पढ़ो, आगे बढ़ो, नाम करो जहाँ में,
आप लोगों से ही है मेरा सम्मान।
ताली बजती नहीं कभी एक हाथ से,
हर समस्या का हल होगा बस साथ से,
आपकी सफलता ही मेरी खुशी है,
आप सभी से ही है मेरी पहचान।
शिक्षक के लिए सारे बच्चे हैं समान,
जीवन की सीख बना देगी राह आसान,
ज्ञान-दीप से रोशन करो सारा जहान,
बस यही दुआ है—
चेहरे पर बनी रहे सदा ये मुस्कान।
🖊️सुभाष कुमार यादव


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







