वो सुनकर न गए, बात तो मुख्तसर सी थी..
रुके थे मगर, मुलाकात तो मुख्तसर सी थी..।
बहुत आरजूओं के बाद, वो वक्त भी आया..
इंतज़ार में थे मगर, रात तो मुख्तसर सी थी..।
दिल के दाग़ धुल जाएंगे, ये उम्मीद थी हमको..
निशान गहरे थे, वो बरसात तो मुख्तसर सी थी..।
उसने सोचा था, कि लौट आयेंगे फिर से हम..
मगर आंसुओं की सौगात तो मुख्तसर सी थी..।
बहुत से मामलात, कल पर रख छोड़े थे हमने..
अब समझे कि, ये हयात तो मुख्तसर सी थी..।
* मुख्तसर - संक्षिप्त या छोटी
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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