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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

मोहब्बत की दुकान भाग-3

मोहब्बत की दुकान भाग – 3

हरिया – दरिया भाई नमस्कार, स्वागत है आपका मोहब्बत की दुकान में।

दरिया – हरिया भाई आपको भी सादर नमस्कार सहित धन्यवाद।

हरिया - दरिया भाई आज इस कार्यक्रम में क्या नई जानकारी अपने पाठकों, लेखकों और लेखिकाओं को देने जा रहे हैं?

दरिया – हरिया भाई आज हम अपने देश में घटित नवीनतम घटनाक्रम पर प्रकाश डालने वाले हैं।

हरिया - दरिया भाई ऐसी कौन सी जानकारी देने जा रहे हैं आप?

दरिया - हरिया भाई आज हम उस नई पार्टी के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं, जो आन लाईन माध्यम से उच्चतम न्यायालय के व्यंग्य से एक कीट के नाम से अस्तित्व में आई है, जिसका नाम काकरेच जनता पार्टी है।

हरिया - दरिया भाई हमने तो मनुष्यों और विचार धाराओं के नाम से पार्टी बनती देखी है, ये कैसी पार्टी है जो कीटों के नाम पर है।

दरिया - हरिया भाई सरकार, उसकी संस्थाएं और राजनीतिक पार्टियां आम जनता को इन्सान समझते ही कहां हैं, उनकी नजर में तो सब कीङे मकौङे ही हैं। इसीलिए सुप्रीम कोर्ट जो सरकार की सबसे जिम्मेदार संस्था है और सबके अधिकारों और गरिमा की रक्षा करने के लिए उत्तरदायी है, वही उन विद्यार्थियों को काकरेच कह कर सम्बोधित करता है, जो सरकार, उसकी संस्थाओं की कार्यप्रणाली और उनकी गलत, अधूरी और अन्यायपूर्ण नीतियों के विरूद्ध आवाज उठाते हैं और उनका विरोध करते हैं।

हरिया - दरिया भाई यह तो इस देश के आम नागरिक के साथ अन्याय है, ये वही सुप्रीम कोर्ट है जो सीबीएसई के सिलेबस में भ्रष्टाचार से सम्बंधित टापिक शामिल करने पर इतना तिलमिलाया था कि उसे हटवाने के लिए अदालत की मानहानि का केस चलाने की धमकी दे डाली थी, क्या आज वही सुप्रीम कोर्ट इस बात के लिए युवा छात्रों से इस कृत्य के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगेगा? शायद नहीं, क्योंकि अब सरकारी संस्थाओं में नैतिकता नाम की चीज नहीं रही है।

दरिया - हां दरिया भाई, आजकल यही ट्रेंड चल रहा है, हर एक सरकार, राजनीतिक पार्टी और सरकारी संस्थाएं अपनी जिम्मेदारी और नैतिक कर्तव्यों को भूल गए हैं, इसलिए आम लोग और नवयुवक उद्दण्ड, गैर जिम्मेदार और अनुशासनहीन होते जा रहे हैं और समाज में अपराध का ग्राफ बढ़ता जा रहा है और सरकार इस तरफ कोई ध्यान ही नहीं है।

हरिया - हां, दरिया भाई आपने बिल्कुल सही कहा, अगर सरकार और उसकी संस्थाएं सही ढंग से कार्य और व्यवहार संस्कृति को अपनाएं तो ये समस्या ही उत्पन्न न हो।

दरिया - हरिया भाई यही तो मूल कारण है। देश में अराजकता, अव्यवस्था और भ्रष्टाचार की स्थिति हर और देखने को मिल रही है। नौकरी में भ्रष्टाचार, सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार, परीक्षा में भ्रष्टाचार, ऊपर से आम नागरिकों को मंहगाई, मुद्रा स्फीति, पश्चिम एशियाई देशों में युद्ध और साईबर अपराध का वार हलकान किए जा रहा है।

हरिया - दरिया भाई ये काकरेच पार्टी किसलिए बनी है, इसका उद्देश्य क्या है?

दरिया - हरिया भाई नीट और यूजी की परीक्षा का पेपर लीक होने और सीबीएसई के परिणाम में गङबङ होने और सुप्रीम कोर्ट द्वारा छात्रों पर अनुचित और अनावश्यक टिप्पणी करने के विरोध में शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगने के लिए बनाई गई है, जो अन्ना हजारे की तरह पापुलर होना चाहती है। इसका मूल उद्देश्य छात्रों द्वारा की गई आत्महत्या के लिए न्याय मांगना और उनकी समस्याओं का सही ढंग से समाधान करना और उन्हें न्याय दिलाना है।

हरिया - दरिया भाई इस पार्टी का भविष्य क्या है?

दरिया – हरिया भाई इस पार्टी के करोङो आनलाईन फालोअर बन चुके हैं लेकिन भौतिक रूप से इस पार्टी के पास कोई राजनीतिक अनुभव, कार्यकर्ता, और जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कार्य बल या काडर फोर्स नहीं है, जिसके लिए इसे अभी लम्बा संघर्ष करना होगा और भौतिक बल को संगठित करना होगा। अभी यह आनलाईन समर्थन ही जुटा पाई है। पार्टी के रूप में स्थापित होने के लिए अनवरत संघर्ष करना होगा, अन्यथा कुछ दिनों बाद यह अपने आप ही लुप्त हो जाएगी।

हरिया - दरिया भाई हम चाहते है कि भविष्य में छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो, परीक्षा सही तरीके से सम्पन्न हो और नौकरियां योग्यता के अनुसार मिलें ऐसा तन्त्र सरकार विकसित करे और यह पार्टी तब तक सरकार के सामने डटकर खड़ी रहे, जब तक इन समस्याओं का समाधान न हो जाए।

दरिया - हां हरिया भाई हम भी यही चाहते हैं, सरकार और उनकी सभी संस्थाएं अपने कार्य में पारदर्शिता लाएं और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जाए ताकि देश सचमुच विकास के मार्ग पर अग्रसर हो।

हरिया - दरिया भाई यह तो हुई पार्टी की बात आप अपने पाठकों और लेखकों को क्या सुनाने जा रहे हैं?

दरिया - हरिया भाई आज तो बस एक मुक्तक सुनाने का मन कर रहा है, लीजिए पेश है –

हरिया - दरिया भाई जरा रुकिए, गर्मी बहुत हो रही है और हमारे कई पाठक और लेखक भूख और प्यास से तड़प रहे हैं पहले उन्हें थोड़ा सा शर्बत तो पिलाने दो, कहीं डिहाइड्रेशन न हो जाए।

दरिया - हां,हां क्यों नहीं, वन्दना जी को आप अन्दर बुलाइए ना, वो इस कार्य में बहुत कुशल और दक्ष हैं, और उन्हें ऐसे धार्मिक और शुभ कार्यों में बहुत रूचि है। उनकी सेवा भावना और उपदेश तो देखते ही बनते हैं, मगर यहां कौन-कौन उपस्थित है यह जानकारी तो आपने हमें दी ही नहीं।
हरिया - दरिया भाई आपको यहां उपस्थित लोग तो दिख ही रहे हैं फिर भी मैं बताए देता हूं कि यहां कौन-कौन बैठे हैं? इधर बांए से पहली पंक्ति में, कृष्णा शर्मा, रीना प्रजापत, वन्दना जी, सुप्रिया साहू और अर्पिता पांडेय, दूसरी पंक्ति में शिवानी भटनागर, मनोज कुमार समदिल, सुभाष यादव, पवन जी, उपदेश और नेत्र प्रसाद गौतम जी बैठे हैं। बाकी लोगों का नाम याद नहीं आ रहा लिस्ट आ जाएगी तब बताएंगे।

(दोनों वन्दना जी को आवाज लगा कर अन्दर बुलाते हैं, और वन्दना जी अपने सहायक को बारी-बारी सबको शर्बत पिलाने को कहती है)

वन्दना जी - अरे वो सुप्रिया जी को एक गिलास और देना, बहुत दूर से चलकर आई हैं।

सुप्रिया जी - इतना ख्याल रखने के लिए आपका बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद वन्दना जी।

हरिया - (सबको शर्बत पिलाने के बाद) हां तो दरिया भाई अब अपनी कोयल सी सुरीली आवाज में मुक्तक सुनाईए।

दरिया - हरिया भाई लीजिए प्रस्तुत है –

अगर रसूखदारों ने, जिम्मेदारी निभाई होती

यूं जनता तानों से ऐसे तिलमिलाई न होती

अगर सिस्टम में इतनी, खामियां नहीं होती

तो लोगों ने ये काकरोच पार्टी बनाई न होती

हरिया - वाह दरिया भाई, वक्त और हालात पर क्या कमाल का मुक्तक सुनाया है, मजा आ गया, उम्मीद है हमारे पाठकों और लेखकों को भी पसन्द आया होगा। यहां पर तशरीफ लाने के लिए आप सब का बहुत बहुत हार्दिक स्वागत एवं धन्यवाद।

दरिया - हरिया भाई सभी पाठकों एवं लेखकों के साथ-साथ आपका भी बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद।
( शेष अगले भाग में…..)


यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है


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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (3)

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मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

अतिसुंदर अतिसुंदर अतिसुंदर 👌👌🙏 मोहब्बत की इस दुकान में देश की हर चीजें मिल जाती हैं, भैया जी।सादर प्रणाम करता हूं 🙏🙏 हरिया और दरिया दोनों ने तो पूरा दुकान सजा रखा है। बहुत ही सुन्दर सारगर्भित लेख..... राम राम भैया जी!!

Lekhram Yadav replied

आपका इस दुकान में हार्दिक स्वागत है समदिल भाई, आपका बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद एवं सादर नमस्कार

सुप्रिया साहू said

वाह वाह वाह वाह.....मोहब्बत की दुकान अच्छी अच्छी चीजें खाने पीने और सीखने को मिल रही है, इस दुकान को ऐसे ही चलते रहने दीजियेगा, हँसी मजाक और ज्ञानवर्धक से भरपूर यह रचना बहुत खूबसूरत हैं, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

Lekhram Yadav replied

अब ठण्ड पड़ गई होगी कलेजे को शर्बत पीकर, आपका बहुत-बहुत हार्दिक शुक्रिया, आपको सादर नमस्कार।

रीना कुमारी प्रजापत said

वाह बहुत सुंदर.... सबसे खूबसूरत दुकान... ये दुकान और दुकान वाले सभी लाजवाब है बहुत बढ़िया 🙏 सादर प्रणाम आपको

Lekhram Yadav replied

आपका बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद, आपको सादर नमस्कार।

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