गर्दिश-ए-दौराँ भूल पाऊंँ मैं, मेरे हक़ में कोई दुआ करो
आँधियों में भी रहूंँ खड़ी चट्टान सी, मेरे हक़ में कोई दुआ करो
आहत होकर रो भी दूंँ तो, गीली न हो पलकें मेरी
सूख जाए मेरी आँखों का पानी, मेरे हक़ में कोई दुआ करो
जिस पर लुटाया दिल-ओ- जान मैंने, उसी ने तोड़ा दिल मेरा
टूट कर बिखरूँ न अबकी बार, मेरे हक़ में कोई दुआ करो
दुआ करती हूंँ मै भी कि बस अब,आख़िरी हो ये सितम
ज़िंदगी की राह में मिले न कोई सितमगर, मेरे हक़ में कोई दुआ करो
मौसम की तरह बदल जातें हैं, वर्षों पुराने रिश्ते भी अक्सर
किसी मौसम से ज़ख़्मी न हो जिगर, मेरे हक़ में कोई दुआ करो


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







