मैं खुद को कितना मजबूर करता हूँ,
अपनों से अपने को ही दूर करता हूँ।
माँ-बाबा कि थी ख्वाहिश करूँ नौकरी,
सो खुद को स्वर्ग से सुदूर करता हूँ।
अदा किए हैं, उसने कुछ ऐसे ज़ख्म,
यादों की मरहम लगा नासूर करता हूँ।
हो मेरा भला, बाकी सबका नुकसान,
ऐसे हर फैसले को नामंजूर करता हूँ।
महसूस करना तुम, बेबसी को उसकी,
जो हर दफ़ा कहता, जी हुज़ूर करता हूँ।
🖊️सुभाष कुमार यादव


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







