किया जो भी मैंने उसका जुर्म कुबूल है,
याद करना ही तो एक भूल है।
अपने सुकून में जख्म का भी रहना ये भी एक उसूल है,
तुम्हें मोहब्बत से पकड़कर रखना, ये आदतें फिजूल है,
मेरी करने को तुम्हें चाहते रहना,
तुम्हें अपना बार बार बनाते रहना,
नादानी में तुम्हें परेशाँ कर तुम्हें खुश करते रहना,
ये जिन्दगी किनारे करते रहना,
इज्जत की धूल है,
परिपक्व प्रेम में पूर्ण होना,
दोनों की हाँ सोच समझ के होना,
यही पूंजी मूल है,
ये मोहब्बत एक स्कूल है। ।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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