जब संग में विषधर पलते हो।
अपनों को अपने ही छलते हो।।
छलक उठे तब दुख की प्याली।
जहाँ हमदर्द भी हाथ मलते हो।।
फिर काटे न कटे अँधियारी राते।
जहाँ विस्तर जिस्म मसलते हो।।
संयोग से उस घर की बहू बनी।
जिसमें महिलाओं पर न चर्चे हो।।
काँटों से दामन भरा मेरा 'उपदेश'।
जहाँ बिन मौसम मेह बरसते हो।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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