ख्वाबों के हंसों के रथ पर,
बस यादें भेजा करते हो।
एक बार मिलने आ जाओ,
बार-बार क्यों याद आते हो।
अंखियों के सावन भादों से,
प्यास मिलन की कब बुझती है,
इस खारे- खारे पानी से,
दिल की आग और भड़की है।
पलकों में आंसू बन बन कर,
बार-बार क्यों आ जाते हो,
एक बार मिलने आ जाओ,
बार-बार क्यों याद आते हो।
जो पल संग तुम्हारे बीते,
रह-रह कर वे याद आते हैं,
पहले वे हम में खो जाते,
फिर हम उनमें खो जाते हैं।
रात रात भर इन नयनों को,
नींद के लिए तरसाते हो,
एक बार मिलने आ जाओ,
बार-बार क्यों याद आते हो।
जो आरजू अधूरीं थीं वे,
यादों के संग आ जातीं हैं,
मधुर मिलन के चित्र बना कर,
देख उन्हें फिर शर्मातीं हैं।
रोज रोज सपनों में आकर ,
झूठे वादे कर जाते हो,
एक बार मिलने आ जाओ,
बार-बार क्यों याद आते हो।
गीतकार अनिल भारद्वाज एडवोकेट हाईकोर्ट ग्वालियर
सर्वाधिकार सुरक्षित रचनाकार


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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