👉 बह्र - बहर-ए-रमल मुसम्मन महज़ूफ़
👉 वज़्न - 2122/2122/2122/212
👉 अरकान - फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाइलुन
हार माने क्यूँ खड़े हो मुश्किलों के सामने
मुश्किलें होती नहीं कुछ हौसलों के सामने
कर मशक़्क़त छोड़ तू क़िस्मत पे रोना ए बशर
देखी है क़िस्मत बदलते कोशिशों के सामने
किसके दिल में क्या छुपा है कौन है ये जानता
राज़ अपने तुम न खोलो दूसरों के सामने
बंद कर दो तब्सिरा तुम गैरों पे करना यहाँ
ख़ुद भी तो बैठो ज़रा तुम आइनों के सामने
ज़हर घुलने है लगा ऐसा फ़ज़ा में आजकल
प्यार भी झुकने लगा है नफ़रतों के सामने
आदमी जितना समेटे वो उसे कम ही लगे
हारती है जिंदगी भी हसरतों के सामने


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







