धर्म धर्म करते रहना,
सत्य, वाचन कभी ना करना,
झूठ मूठ का काम करना,
धन मन की दौड़ करना,
इंसान में इंसान ना रहना,
क्या यही कहानी रखनी है,
क्या निशानी रखनी है,
क्या इसी से दुनिया चलती हैं,
सिर्फ भ्रम सुधारी चलती हैं। ।
- ललित दाधीच

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
धर्म धर्म करते रहना,
सत्य, वाचन कभी ना करना,
झूठ मूठ का काम करना,
धन मन की दौड़ करना,
इंसान में इंसान ना रहना,
क्या यही कहानी रखनी है,
क्या निशानी रखनी है,
क्या इसी से दुनिया चलती हैं,
सिर्फ भ्रम सुधारी चलती हैं। ।
- ललित दाधीच
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