आज मुझे मेरी बेटी ने मेरे नाम से पुकारा।
जो खो गया था कहीं रिश्तों की ओट में,
कभी चाची, कभी भाभी,
कहीं बहू, कहीं पत्नी,
कभी माँ—
जाने किन-किन नामों से पुकारा जाने लगा था मुझे।
मायके से मिला नाम
जाने कब का भूल चुकी थी मैं।
अभी मैं खोयी हुई थी
अतीत की गहराइयों में,
यादों की परछाइयों में।
अपने ही ख्यालों में डूबी हुई थी मैं।
उसने मुझे फिर मेरे नाम से पुकारा,
तब टूट गयी मेरी तंद्रा।
तब मैं लौट आयी अपने वर्तमान में,
अपने होशों-हवास में।
तब मैंने अपनी नन्ही सी बिटिया
को गले से लगा लिया,
क्योंकि उसने आज मुझे
मेरे नाम और मेरी पहचान को
फिर से याद दिला दिया—
जिसे भूल चुकी थी मैं
रिश्तों की ओट में।
— सरिता पाठक
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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