Newहैशटैग ज़िन्दगी पुस्तक के बारे में updates यहाँ से जानें।


Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat


Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.

Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.



The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

Newहैशटैग ज़िन्दगी पुस्तक के बारे में updates यहाँ से जानें।

Newसभी पाठकों एवं रचनाकारों से विनम्र निवेदन है कि बागी बानी यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करते हुए
उनके बेबाक एवं शानदार गानों को अवश्य सुनें - आपको पसंद आएं तो लाइक,शेयर एवं कमेंट करें Channel Link यहाँ है

The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

रिश्तों की ओट

आज मुझे मेरी बेटी ने मेरे नाम से पुकारा।
जो खो गया था कहीं रिश्तों की ओट में,
कभी चाची, कभी भाभी,
कहीं बहू, कहीं पत्नी,
कभी माँ—
जाने किन-किन नामों से पुकारा जाने लगा था मुझे।
मायके से मिला नाम
जाने कब का भूल चुकी थी मैं।
अभी मैं खोयी हुई थी
अतीत की गहराइयों में,
यादों की परछाइयों में।
अपने ही ख्यालों में डूबी हुई थी मैं।
उसने मुझे फिर मेरे नाम से पुकारा,
तब टूट गयी मेरी तंद्रा।
तब मैं लौट आयी अपने वर्तमान में,
अपने होशों-हवास में।
तब मैंने अपनी नन्ही सी बिटिया
को गले से लगा लिया,
क्योंकि उसने आज मुझे
मेरे नाम और मेरी पहचान को
फिर से याद दिला दिया—
जिसे भूल चुकी थी मैं
रिश्तों की ओट में।

— सरिता पाठक


यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है


समीक्षा छोड़ने के लिए कृपया पहले रजिस्टर या लॉगिन करें

रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (5)

+

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

वाह!! सरिता बहन 🙏🙏🙏 कितना प्यारा सोंच है आपका। भावनाओं की रस में भीगी सुंदर कविता। ससुराल में आकर नाम,काम, जिम्मेदारी सब बदल जाती है।मन लालायित हो जाता है अपनी मायके की पहचान को पाने के लिए।। सादर प्रणाम 🙏🙏 आज की नयी सुबह मेरी प्यारी बहना को सुनहरी खुशियों की किरणों से नहला दे!!

सरिता पाठक replied

धन्यवाद भईया जी, सादर प्रणाम 👌👌👏👏

जयश्री विलास जोधंळे said

वाह! क्या बात है सच मे ससुराल रिस्ते कि लौट से नाम कहीं हमारा गुम हो जाता है और नाम लेने वाला भी साथ ना हो तो हम भी अपना नाम भुल जाते है आपको सादर प्रणाम

सरिता पाठक replied

धन्यवाद जयश्री bhn🙏🌹

आलम-ए-ग़ज़ल - परवेज़ अहमद said

वाह! वाह! वाह! क्या बात है! बहुत ख़ूब! बहुत ख़ूब! बहुत ही बेहतरीन कविता लिखी है आपने, सरिता जी! दिल को छू लिया आपकी रचना ने! लाजवाब! बे-मिसाल! आदाब! 👌👌👏👏❤️🙏🙂

सरिता पाठक replied

बहुत बहुत धन्यवाद परवेज़ भईया जी दिल से आदाब 👏👏

वन्दना सूद said

heart touching पंक्तियाँ ❤️❤️

सरिता पाठक replied

धन्यवाद वन्दना बहन 🙏🙏🌹❤️

उपदेश कुमार शाक्यावार said

बहुत सुंदर रचना ..सरिता जी को सादर प्रणाम 🙏🙏

सरिता पाठक replied

धन्यवाद सर जी 🙏👏

कविताएं - शायरी - ग़ज़ल श्रेणी में अन्य रचनाऐं




लिखन्तु डॉट कॉम देगा आपको और आपकी रचनाओं को एक नया मुकाम - आप कविता, ग़ज़ल, शायरी, श्लोक, संस्कृत गीत, वास्तविक कहानियां, काल्पनिक कहानियां, कॉमिक्स, हाइकू कविता इत्यादि को हिंदी, संस्कृत, बांग्ला, उर्दू, इंग्लिश, सिंधी या अन्य किसी भाषा में भी likhantuofficial@gmail.com पर भेज सकते हैं।


लिखते रहिये, पढ़ते रहिये - लिखन्तु डॉट कॉम


LIKHANTU DOT COM © 2017 - 2026 लिखन्तु डॉट कॉम
Designed, Developed, Maintained & Powered By HTTPS://LETSWRITE.IN
Verified by:
Verified by Scam Adviser
   
Support Our Investors ABOUT US Feedback & Business रचना भेजें रजिस्टर लॉगिन