हास्य कविता : चड्डी की महत्व....
सब्जी मंडी बाजार में
मिली एक सुंदर नारी
उसने मुझ को अपनी
आँखें दो बार मारी
मैं सोचा उसने मुझ को
अच्छा सिग्नल दिया
मैंने भी उसके गाल पर
दो तीन किस किया
इतने में उस का पति बोला,
तूने मुझे बड़ा धक्का दिया
भरे बाजार में मेरी अपनी बीबी
को कैसे तूने किस किया ?
मैं बोला, भाई साहब आप की बीबी
गलत है इसने ही सिग्नल दिया
मुझ से भी रहा न गया इस
लिए मैंने भी इसे किस किया
वो बोला, ये बेचारी सीधी
सादी नादान है
तू ही कमीना एक नंबर
का बेइमान है
तेरा वजूद अभी यहीं भरे
बाजार में ही तोडूंगा
तेरे कपड़े बनियान चड्डी उतार
तुझे नंगा करके छोडूंगा
मैं बोला, हाथ जोड़ बेशक मुझे
जितना सकते हो मारो
मेरा भी इज्जत का सवाल है
मेरी चड्डी ना उतारो
चड्डी मेरी उतरी तो मेरा प्राइवेट
पार्ट औरत मर्द देखते ही रहेंगे
खैर मर्द की छोड़ो औरत
लोग न जाने क्या क्या कहेंगे ?
मगर मेरी एक न सुनी
मुझे बहुत मार रहा
कमबख्त उसने मेरी
चड्डी भी उतार रहा
मैं निर्दोष अकेला वहां पर
मेरा कोई सहायक नहीं है
पाठक वर्ग आगे मेरा क्या हुआ ?
ये तो बताने लायक नहीं है
पाठक वर्ग आगे मेरा क्या हुआ ?
ये तो बताने लायक नहीं है.......
netra prasad gautam


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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