नव वर्ष की पावन बेला से मांगती
एक उपहार
छंद अलंकारों की लड़ियों से सजा दो मेरी कविता का संसार
तम के गहरे अंधियारे मन में ज्ञान का फैला दो अनवरत उजियार
नवबर्ष की इस बेला से मांगती
एक उपहार
निराशा के गहरे सागर में डूबे
मन में आशा का कर दो तुम नूतन संचार
पीड़ा से करहाते तन और मन को
खुशियों का दे देना तुम उपहार
नवबर्ष की इस बेला से मांगती
एक उपहार
नफरत और ईर्ष्या की वेदी पर जलते
चमन की अग्नि बुझा कर
स्नेह कर दो अनुपम उपकार
रूठ गए है जिनके मनमीत
उनको मिला दो अबकी बार
नवबर्ष की इस बेला से मांगती
एक उपहार
✍️ अर्पिता पांडेय


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







