अपना सबकुछ मेरे खातिर वो दांव पे लगा चुकी थी,
उसे झुका देने की ज़िद मेरे लहज़े पे आ चुकी थी।
ये फ़रेब समझते उसे देर न लगी ज़रा भी,
मगर तब तक वो मेरे सदके पे आ चुकी थी।
मैंने कितना ही दिल दुखाया होगा उसका...
जब आख़िरी दफ़ा उसे देखना चाहा,
तो वो क़ब्र से उठकर जा चुकी थी...!
#कमलकांत घिरी✍️


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







