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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

क़ब्र से उठकर जा चुकी थी - कमलकांत घिरी

अपना सबकुछ मेरे खातिर वो दांव पे लगा चुकी थी,
उसे झुका देने की ज़िद मेरे लहज़े पे आ चुकी थी।

ये फ़रेब समझते उसे देर न लगी ज़रा भी,
मगर तब तक वो मेरे सदके पे आ चुकी थी।

मैंने कितना ही दिल दुखाया होगा उसका...
जब आख़िरी दफ़ा उसे देखना चाहा,
तो वो क़ब्र से उठकर जा चुकी थी...!

#कमलकांत घिरी✍️




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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (7)

+

Lekhram Yadav said

क्या बात है कमलकांत भाई, अब मुर्दों को भी जिन्दा करने लगे हो, बहुत खूबसूरत रचना,आपको सादर नमस्कार

कमलकांत घिरी replied

बहुत शुक्रिया सर जी 🙏 आपको मेरा सादर प्रणाम 🙏

कृष्णा शर्मा said

👏👏👏
बहुत हीं खूबसूरत रचना भाई 👏👏👏👏
वो कब्र सें उठकर जा चुकी 👏👏👏
बहुत हीं खूबसूरत पंक्ति...
कमाल 👏👏

कमलकांत घिरी replied

बहुत बहुत धन्यवाद आपका😊🙏

सरिता पाठक said

बहुत खूबसूरत रचना, हर पंक्ति लाजवाब, ह्रदयस्पर्शी, 👌सादर प्रणाम 🙏

कमलकांत घिरी replied

बहुत शुक्रिया मैम 🤗🙏 प्रणाम 🙏

सुप्रिया साहू said

वाह वाह....दर्द इतना था कि उसे कब्र में भी नींद नहीं आई, बहुत खूबसूरत रचना कमल सर 👌👌, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

कमलकांत घिरी replied

बहुत शुक्रिया सुप्रिया जी😊🙏

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

प्यार तो इतना निर्मल निश्छल होता है कि फरेब में भी प्यार ही नजर आता है। खूबसूरत रचना 👌🌹🙏

कमलकांत घिरी replied

बहुत शुक्रिया सर जी🙏🍁😊

वन्दना सूद said

वाह वाह क्या खूब लिखा 👏👏

कमलकांत घिरी replied

बहुत शुक्रिया मैम 🤗🙏 प्रणाम 🙏

रीना कुमारी प्रजापत said

Haaaaye kya dard hai

कमलकांत घिरी replied

शुक्रिया दीदू जी 🙏

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