जिसको हमने दिल से चाहा
जिसको हमने दिल से चाहा उसने ही दिल तोङ दिया
बीच भंवर में लहरों के संग उस ने हम को छोङ दिया
तूफानों ने हम को गले लगाया दामन लहरों ने थामा
छोङ के हम को तूफानों में, रूख धारों का मोङ दिया
टूट के हमने उनको चाहा सब कुछ अपना वार दिया
विरानी सी इन राहों में, क्यूं उस ने हम को छोङ दिया
उन की यादें जब-जब आई हम को इन बाग बहारों में
उन्हीं बहारों ने हम को, फिर से तङपा कर छोङ दिया
क्यूं, होता है अक्सर ऐसा, यह भी हम को मालूम नहीं
क्यूं प्यार की राहों में, उस ने हम को छोङ दिया
काश बता देते हम को भी कारण क्या था जाने का
दुश्मन हो गए अपने सारे हर ख्वाब हमारा तोङ दिया
मचल रहे हैं यह भंवरे सारे थाम के अपने दिल को
जब, कलियों ने बागों में, भंवरों से मिलना छोङ दिया
वो रूठ गए हैं हम से ऐसे जैसे ये कलियां रूठ गई
भोर में सारी कलियों ने, ओस का घूंघट ओढ़ लिया
अब खाते हैं धक्के यादव, रोज यूं ही इन गलियों में
जब समझ के उस ने नाकारा, दिल ये मेरा तोङ दिया
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







