युद्ध या बुद्ध।।
चाहे कितने भी युद्ध करते रहो,
जहाँ में ना कोई बुद्ध का सानी है।
विध्वंस,हत्या और खुन बहाकर,
फिर अंत में बातचीत ही होनी है।।
मानव सभ्यता का विनाश करके,
मासुमों को युद्ध तबाह करते हैं।
तुम शवों का यूं अंबार लगाकर,
मन्नू जीतकर भी क्या क्या पाते हो।।
हिंसा जानवरों की सच्ची पहचान है,
कायरो का ही हिंसा हथियार है।
तानाशाही का प्रमुख आधार है,
मानवता पर लगा बदनुमा दाग है।।
यूएसए,इजरायल व ईरान के मध्य,
मिसाईलों से यूं हो रहा महासमर है।
तीसरे विश्वयुद्ध की इस आशंका से,
आज संकट में खडा़ संपुर्ण विश्व हैं।।
मनू चाहे युद्ध कोई भी लड़ते हो,
मंहगाई की मार सब पर भारी है।
तेल और गैस की मारामारी से,
वो तरास्दी तो चारो ओर मची है।।
शांंति जीवन के लिए अपरिहार्य है,
संस्कारो की पहली पहचान है।
शांति विकास का मुख्य आधार है,
शांति ही मानवता की मिसाल है।।
शांति ही मानव का कल्याण है,
जीओ और जीने दो का सार है।
गौतम बुद्ध की इस पावन धरा से,
सब के लिए शांति अंतिम पैगाम है।।
स्वरचित,मौलिक अप्रकाशित है।
मुन्ना राम मेघवाल ।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।
+91 88756 50006.


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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