हँसते - हँसते ज़िन्दगी, उसने काटी यार।
जिसने मानी सभ्यता, समझा शिष्टाचार।।
समझा शिष्टाचार, मनुजता को अपनाया।
जी भर जीया प्यार,खुशी के गीत लुटाया।।
'प्यासा' चलता राह,सनातन के जो रस्ते ।
जीता हो संतुष्ट,जिन्दगी हँसते - हँसते ।।
✍️ प्यासा

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
हँसते - हँसते ज़िन्दगी, उसने काटी यार।
जिसने मानी सभ्यता, समझा शिष्टाचार।।
समझा शिष्टाचार, मनुजता को अपनाया।
जी भर जीया प्यार,खुशी के गीत लुटाया।।
'प्यासा' चलता राह,सनातन के जो रस्ते ।
जीता हो संतुष्ट,जिन्दगी हँसते - हँसते ।।
✍️ प्यासा
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