अकेले हो अगर सफ़र में, तो एक किताब ज़रूरी है, भीड़ भरी इस दुनिया में, खुद से एक मुलाक़ात ज़रूरी है।
दिल की गहराइयों में दबिश है एक खामोशी की,
इसमें शोर भरने के लिए एक बुलंद आवाज ज़रूरी है,
ज़मीं को जीत ली होगी तुमने सिकंदर की तरह बेशक, मगर आसमान जितनी हो तो परों की उड़ान ज़रूरी है।
खुद को निखारकर ख़ूब से बेहतर, बेहतर से बढ़कर वाली, उस ऊँचे मुकाम तक ले जाना ज़रूरी है।
तहज़ीब, तालीम, मज़हब, ईमान सब अपनी जगह,
जो तकलीफ़ में खड़ा हो, वो इंसान ज़रूरी है।
फ़रेब की इमारत खड़ी कर दी है लोगों ने,
जो फ़रेब की जड़ें काट दे, वो सच्ची ज़ुबान ज़रूरी है।
जहाँ से आती है बुलंदी की गूंज कानों तक,
अपने कानों को उस दीवार तक ले जाना ज़रूरी है।
ज़रूरी है पेश-ए-अदब हर कलाम के सामने मगर,
इतनी नहीं जितनी हिफाज़त अपनी अना की ज़रूरी है..!
@कमलकांत घिरी✍️


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







