जागो अब पहचानो खुद को,
मत बाँटो हर साँस को।
जाति-धर्म की ऊँची दीवार,
ढहने दो इस बार।
नफ़रत की हर आग बुझाओ,
प्रेम का दीप जलाओ।
भूखा कोई सोए क्यों,
अन्न पड़े फिर खोए क्यों।
बेटी घर की शान बने,
हर आँगन पहचान बने।
वृक्ष लगाओ, जल बचाओ,
धरती का श्रृंगार सजाओ।
सच की राह कठिन सही,
झूठ कभी आधार नहीं।
हाथ किसी का थाम चलो,
गिरते को भी साथ चलो।
स्वार्थ नहीं, उपकार चुनो,
मानवता का द्वार चुनो।
शिक्षा का हर दीप जले,
ज्ञान से अँधियारा ढले।
देश तभी महान बने,
जब हर जन इंसान बने।
मिलकर नई दिशा गढ़ें,
सपनों को साकार करें।
यही समय का सच्चा नाद,
यही समाज का है संवाद।
आओ ऐसी राह चुनें,
सबके जीवन में
उम्मीदों के फूल बुनें।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







