हम भी देखो कितने काबिल हुए,
हमें भी कितने दर्द हासिल हुए,
जो टूट रहा था वो पकड़ रहा था,
जो पकड़ रहा था वो छूट रहा था,
कितनी यादों से हम आघात हुए,
झूठे थे हम अपनी इज्जत में बरसात हुए,
किसके मिलने से हम इतने राख हुए,
वो पूछते हैं कि हम कितने बर्बाद हुए,
रूठे को मनाते मनाते ही बर्खास्त हुए,
हम इलाज के बाद बीमार हुए,
जितने आशिक आज हैं उतने ही हर बार हुए,
मोहब्बत में जीने मरने वाले,
अपनी ही कतार से बाहर हुए,
हम अलबेले और वो होशियार हुए,
एक इश्क़ के दो ग़द्दार हुए,
कसम के ये खेल ही लाचार हुए,
इश्क के वारिस आज बाजार हुए।।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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