परछाइयाँ (नज़्म)
कुछ यादें साथ चलती रही उम्र भर मेरे
न धूप में, न छाँव में हैं छोड़तीं मुझे
कुछ इस कदर भीग गया हूं मैं याद में
अब रह रहकर आहें मेरी निचोड़तीं मुझे
न जाने कौन कौन सी परछाइयां हैं ये
या मेरे ही ज़हन में बसी गहराईयां हैं ये
इन परछाइयों ने मुझे घेरा है इस कदर
कि अपनेआप से ही हो गया हूं बेख़बर
मुझसे कभी बड़ी कभी छोटी ये हो गईं
और कहीं फिर चलते हुए ये खो गईं
कभी गहरी हैं ये, कभी हैं हल्की
ये आज की है नहीं, ये हैं कल की
इन परछाइयों ने घेरकर मारा है फिर मुझे
तो रह रहकर दिल ने पुकारा है फिर तुझे।
अनमोल


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







