कोई क्या कहता है कोई क्या कहता है,
किसी की जुबां पे कोई दिल रहता है,
आदमी की आदत ने गुनाह के घर किये हैं,
जज्बातों में सारे दिन इतराता है,
वैसे वो ही जानता है जो मिलने को बेकरार रखता है सबको,
मोहब्बत देकर हमारे खाली हाथ कर जाता है,
ये मैं भूल करता हूँ 'ललित',
रोज मिटने वाला इंसां खुद को जानने आता है।।
- ललित दाधीच।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







