अमुवा की डाली डाली से
बौरों से रस मीठी बरसें
प्रणय गीत चंचल कोयल की
सुर श्रृंगारिक मन में भर दे
मधुर सुरभि ले चलें बयारें
सांसों को हिम शीतल कर दे
तन प्रफुल्लित मन प्रफुल्लित
रग रग में अनुराग भर दो
आओ आओ हे बसंत!
देश प्रेम का राग भर दो!!
महुए की पीली फूलों से
होवे मंद पवन मतवाली
नव नव किसलय की होंठों से
मुस्काए हर डाली डाली
सौर किरन की स्वर्ण चमक से
लगे क्षितिज की छटा निराली
नये नये उत्कर्ष ले आओ
हृदय हृदय में फाग भर दो!!
आओ आओ हे बसंत!!
देश प्रेम का राग भर दो!!
बिछ जाए जब दूर दूर तक
बनटेसू रंग लाल सुनहरी
लगे वो जैसे भारत मां की
प्यारी प्यारी धानी चुनरी
पुष्प पुष्प की प्रीत मंजरी
भर दे सबकी मन गघरी
रोम रोम सन जाए जोत में
देव भूमि में चिराग कर दो!!
आओ आओ हे बसंत!!
देश प्रेम का राग भर दो!!
सूरज के जगने से पहले
झुरमुट झुरमुट पंछी चहके
सर्व धर्म समभाव सुंगध से
जन जन का मन मन महके
राष्ट्रप्रेम की परंपरा अब
दिशा दिशा में घूमें चलके
त्याग-तपस्या-फूल-विविध से
सुरभित हर मन बाग कर दो!!
आओ आओ हे बसंत!!
देश प्रेम का राग भर दो!!
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







