अब, इतनी शरारत और
नजाकत भरी नजरों से
स्वयं को, देर तक न देखा करो,
बेबसी की हद से आगे,
आइने टूट जाती है,
हमारी तरह,
कजरा ,गजरा, लाली, उबटन
सबके सब, तुम्हें पुकारती हैं
कि,आओ हमें देखो और छुओ,
व्याकुलता की हद से आगे,
सबके सब रूठ जातीं हैं
हमारी तरह,
सुनहरी प्रभात,
दोपहर,सांझ,रात, सबके सब
करतें रहते हैं, तुम्हारी चाटुकारी
चापलूसी की हद से आगे,
सबके सब छूट जातीं हैं,
हमारी तरह।
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







