वो ग़ज़ब के होशियार है, मगर हमसे थोड़े कम..
ज़माने से भी खबरदार हैं, मगर हमसे थोड़े कम..।
उनसे मर्ज़-ए-यार, किसी तरह छुपाया न गया..
उन्हें होगा, जब्र-ओ-इश्क़-ए-बुख़ार, मगर हमसे थोड़े कम..।
वो जाने क्यूँ बात को, उस कदर घुमाया करते हैं..
उनके पास होंगे बहाने हज़ार, मगर हमसे थोड़े कम..।
उनका तराज़ू भी सही तौले है, और दाम भी है जायज़..
उनका खूब चलता है ब्यौपार, मगर हमसे थोड़े कम..।
वो खाते हैं बार बार कसमें, अपने किरदार की दोस्तो..
उनको ज़माने से ज़ियादा है खुद पे एतिबार, मगर हमसे थोड़े कम..।
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







