पूरा सवाल ज़िंदगी का, मुझसे कभी हल ना हुआ..
मैं शख्स कुछ अधूरा था, कभी मुकम्मल ना हुआ..।
कभी बरस अनायास बीते, तो कभी पल ना गुज़रा..
वक्त ने तो छल किया, हमसे कभी छल ना हुआ..।
एक तो दुनिया ने हमको, दुनियादारी ना सिखलाई..
उधर ज़माना भी हम जैसा, कभी सरल ना हुआ..।
होंगे दिल के शाहजहां, और मुहब्बत की मुमताज़ भी..
मगर चांदनी में नहाया, उस जैसा कोई ताज़महल ना हुआ..।
उनको उम्मीद थी कि हम, उनके मन·मुआफिक बदल जायेंगे..
दिल जिद पर रहा, समझाने पर भी फेरबदल ना हुआ..।
-पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







