"गीत लिखूं"
नदियां झरने लिखूं , घटाएं सुख देता संगीत लिखूं।
देख तुम्हारी झील सी आंखें, प्रेम भरा एक गीत लिखूं।
कोई पूछे कैसी हो तुम, शीत काल की धूप लिखूं मैं।
चाहत में मीरा सी दीवानी, राधा का प्रतिरूप लिखूं मैं।
कानों को जीवन देती हो, ऐसी है आवाज तुम्हारी।
फूलों जैसी कोमलतामय, नाजुक सुंदर देह तुम्हारी।
जब आती हो निकट हमारे, लगता है ज्यो भोर हुआ।
प्रीति भरी मुस्कान देख, मेरा हृदय भावविभोर हुआ।
मेरी मानो श्वेत वस्त्र तुम ना पहनो, तो अच्छा है।
कब तक नजर उतारूंगी मैं, मेरी ही नजर समस्या है।
जैसे गिरता शीतल झरना, वैसी है ये नजर तुम्हारी।
कोई पूछे स्वर्ग हमारा, मैं तुझको मनमीत लिखूं।
आओ बैठो मेरे सामने, तुम्हें देखकर गीत लिखूं।
✍️✍️पल्लवी श्रीवास्तव-
ममरखा, अरेराज, पूर्वी चम्पारण (बिहार)


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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