चलना हो दूर तलक, छोड़ दे मन का मान।
राह कठिन हो जाए जब, थामे रखना प्राण॥
मन में गाँठ न पालिए, बात गई तो जाने।
रिश्ता वही बचा रहे, जो फिर से लगे मुस्काने॥
अपना-अपना दोष गिने, तो कौन रहा अपना।
एक कदम तू छोड़ दे, एक कदम वह अपना॥
शब्द कभी तीर बनें, मौन करे आघात।
फिर भी प्रेम बचाइए, यही बड़ी सौगात॥
रूठे मन को जीतना, जीत नहीं संसार।
अपनेपन की छाँव में, मिटता मन का भार॥
माफ़ी ऐसी दीप है, जले बिना उजियार।
जिस घर में यह जल उठे, टिके प्रेम-परिवार॥
किसने कितना दुख दिया, इसका मत रख हिसाब।
किसने गिरकर थाम लिया, बस इतना रख याद॥
राह बहुत है दूर की, साथी है अनमोल।
मन से मन जब जुड़ गया, हल्का हर एक मोल॥
चलना हो तो साथ चल, छोड़ कपट-अभिमान।
प्रेम बचाना सीख ले, यही मनुज की शान॥


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







