सुलूक कैसे–कैसे, दिल से निभाए हमने..
खुद से ही खुद के, कई राज़ छुपाए हमने..।
यकीं किया, कुछ इस कदर कि यकीं नहीं होता..
दिन के रोशनियों में भी, कई धोखे खाए हमने..।
सोचा था उनकी गलियों से न गुजरेंगे हम..
ये सोच कर ही, राहों में कांटे बिछाए हमने..।
न हवाओं ने न आसमां ने तवज्जो दी हमको..
दिल की आवाज पर ही, ये पंख फैलाए हमने..।
मुहब्बत तो कभी भी सर उठा लेती है "क्षितिज"
जाने क्या सोच कर, उनके खत जलाए हमने..।
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







