चाहतो के दिलकश ज़माने गए।
मौसम आए कितने सुहाने गए।।
जिद्द मे न आने की जुर्रत बढ़ी।
करीबी गए उनके आशियाने गए।।
प्रचार करने के बहाने गए 'उपदेश'।
तेरे बचपन के सारे ठिकाने गए।।
- उपदेश कुमार शाक्यवार 'उपदेश'
गाजियाबाद

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
चाहतो के दिलकश ज़माने गए।
मौसम आए कितने सुहाने गए।।
जिद्द मे न आने की जुर्रत बढ़ी।
करीबी गए उनके आशियाने गए।।
प्रचार करने के बहाने गए 'उपदेश'।
तेरे बचपन के सारे ठिकाने गए।।
- उपदेश कुमार शाक्यवार 'उपदेश'
गाजियाबाद
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