पहला प्यार हुआ तो क्या किया,
भरोसा दिलाया मगर खो दिया तो क्या किया,
शादी दो के बीच हुई बिछुड़ गए तो क्या किया,
नज़र आना मुश्किल हुआ तो क्या किया,
घर से महल बना दिए तो क्या किया,
आँसू में ज़िन्दगी बहा दिए तो क्या किया,
क्षमा करोगे पर ठहरोगे नहीं तो क्या किया,
मुस्कान से मुकर गए मुहँ फुलाकर तो क्या किया,
शय मात तो होती रहेगी साथ होकर पास कुछ नहीं तो क्या किया,
अगला जन्म ये जन्म पिछला जन्म बस सुधारने में रहोगे, बाकी जिदंगी का ठिकाना नहीं तो क्या किया,
तुम बढ़ते हो तो अपना स्तर बढ़ाते हो,
मुश्किल से मुश्किल काम यूं करते हो,
पर इसी को जन्नत नहीं माना तो क्या किया,
ईश्वर नहीं मिलेगा क्यूँ तो,
तुम जैसे ऊँचाई पर जाते हो,
तुम खुद को पूर्ण करते जाते हो,
तो ईश्वर के अंश का पूर्ण और बढ़ना,
तो ईश्वर का भी बढ़ना और पूर्णता के स्तर को बदलना,
अब ये ना समझ आया तो क्या किया,
जब खुद को ही नहीं पेश किया,
और सब सब करते रहे तो क्या किया।।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







