के रुक जा जरा ठहर तो सही
मैने तुझमे ख्वाब पिरोए है
कुछ होने दे अभी अरमां पूरे
मैने कितने पलक भिगोए है
अचानक ना निकल ए जवानी
मैने वर्षों तक तुझे पाला है
ऐसे ना रूठ ए जाने बहार
तुझे बालक की तरहा संभला है
अठरा वर्ष देखा तुझे मुकाम की तरहा
मेरे पास आ मुझसे लिपट
दूर से ना निकल गुम नाम की तरहा
तेरे बिना तन फटा अंगरखा
सूखी डाली जैसे ना हो बरखा
ए जवानी मुझे पे यकीन तो कर
किसी को तेरी खबर नहीं लगने दूंगा
सीने से लगा लूं ताबीज की तरहा
नज़र कोई तुझे ना लगने दूंगा
नीटू मावी


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







