(बाल कविता)
सुंदर मोर
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पंख पसारे चारों ओर।
नाच रहे हैं सुंदर मोर ।।
इंद्रधनुष के रंगों वाले
चांद सितारे पंखों वाले
जंगल में मंगल कर देते
पीहू-पीह करके शोर ।
नाच रहे हैं सुंदर मोर ।।
नहीं साँप से डरने वाले
कभी पाप न करने वाले
मुश्किल में भी धैर्य न खोते
पड़ते नहीं कभी कमजोर ।
नाच रहे हैं सुंदर मोर ।।
सबको सुख पहुँचाने वाले
कभी नहीं इतराने वाले
निर्मल शांत भाव से हरदम
करते सबको भाव विभोर ।
नाच रहे हैं सुंदर मोर ।।
सिर पर रखते कलगी ताज
करते नहीं स्वयं पर नाज
फ़ौरन आकर्षण में बाँधें
प्रेम भाव की लेकर डोर ।
नाच रहे हैं सुंदर मोर ।।
राष्ट्रीय पक्षी ये कहलाते
सुंदरता जग में फैलाते
पंखों का सिर मौर सजाते
कृष्ण कन्हैया माखन चोर।
नाच रहे हैं सुंदर मोर ।।
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~राम नरेश 'उज्ज्वल'


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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