उम्र भर रही, इक आस बाकी..
फ़ुरसत की रही, तलाश बाकी..।
घर से तो निकले, बे-मंज़िल ही..
रास्तों की मगर है, प्यास बाकी..।
खोई है कोई चीज, मगर जाने क्या..
दिखता नहीं, बस अहसास बाकी..।
तन से तो उतर गये सब मोती-मनके..
रूहों पर है, दुनियाई लिबास बाकी..।
चेहरा-ए-माज़ी पे, तबस्सुम की लकीर..
मिटी ऐसे कि, नहीं अब इतिहास बाकी..।
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







