"🌺 माँ दुर्गा के नौ रूप 🌺"
नौ रातों का पावन पर्व, भक्ति का अनुपम गान,
माँ दुर्गा के नौ रूपों में बसता जग का कल्याण।
शक्ति, श्रद्धा, प्रेम, करुणा, माँ की महिमा अपार,
चरणों में शीश झुकाता है, यह सारा संसार।
प्रथम रूप माँ शैलपुत्री, पर्वतराज की दुलारी,
वृषभ पर आरूढ़, त्रिशूलधारिणी, छवि अति प्यारी।
मन में दृढ़ विश्वास जगाएँ,
दें जीवन को आधार,
माँ की कृपा से खुल जाते हैं, सुख-समृद्धि के द्वार।
द्वितीय रूप माँ ब्रह्मचारिणी, तप की ज्योति महान,
हाथों में जपमाला, कमंडल, मुख पर दिव्य मुस्कान।
संयम, साधना, धैर्य सिखाएँ, भक्ति का दें वरदान,
उनकी कृपा से पूर्ण हो साधक के सब अरमान।
तृतीय रूप माँ चंद्रघंटा, शौर्य और सौंदर्य की खान,
मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित, मुख पर दिव्य प्रभा महान।
दुष्टों का संहार करें, भक्तों का उद्धार,
उनकी सिंहनाद से काँपे, अन्याय का संसार।
चतुर्थ रूप माँ कूष्मांडा, सृष्टि की आधार,
अपनी दिव्य मुस्कान से रचतीं ब्रह्मांड अपार।
सूर्यलोक में तेज बिखेरें, जीवन में उजियार,
उनकी कृपा से मिट जाते हैं, दुख-संकट के भार।
पंचम रूप माँ स्कंदमाता, ममता की प्रतिमूर्ति,
गोद में बाल स्कंद विराजें, मुख पर करुणा-मूर्ति।
संतानों को सुख प्रदान कर, भरतीं हृदय में प्यार,
माँ के आँचल की छाया में, मिलता सुख अपार।
षष्ठम रूप माँ कात्यायनी, दुष्ट-दलन की शक्ति,
धर्म-रक्षा के लिए जगातीं, जन-जन में अनुरक्ति।
साहस, तेज और आत्मबल का देतीं शुभ संदेश,
उनकी महिमा से पावन होता, अपना भारत देश।
सप्तम रूप माँ कालरात्रि, भय का करतीं नाश,
घोर अंधकार में भी जगातीं, आशा का विश्वास।
दुष्टों के अभिमान को हरतीं, भक्तों की रखवाली,
शुभंकरी माँ की महिमा न्यारी, जग से निराली।
अष्टम रूप माँ महागौरी, निर्मलता की खान,
श्वेत वस्त्र, उज्ज्वल आभा, मुख पर दिव्य मुस्कान।
पाप-ताप सब दूर भगाकर, करतीं जीवन शुद्ध,
उनकी कृपा से मन हो निर्मल, विचार बनें विशुद्ध।
नवम रूप माँ सिद्धिदात्री, सिद्धियों की दात्री,
देवों, ऋषियों, भक्तों की माँ, जग की भाग्य-विधात्री।
ज्ञान, विवेक, सुख और समृद्धि का देतीं वरदान,
उनके चरणों में मिलता है, जीवन का सम्मान।
नौ रूपों में एक ही शक्ति, नौ रूपों में प्यार,
माँ के चरणों में मिलता है, जीवन का आधार।
नौ दिन दीप जलाएँ मिलकर, करें भक्ति का गान,
माँ दुर्गा के आशीषों से, सुखमय हो हर प्राण।
मिटे द्वेष और घृणा जगत से, प्रेम खिले हर द्वार,
हर नारी को मान मिले और, मिटे दुखों का भार।
सत्य, धर्म और न्याय का हो, हर आँगन में वास,
माँ दुर्गा पूरी करें सभी की, मन में बसी आस।
जय माता दी! जय जगदम्बे! जय दुर्गे महारानी!
तेरी महिमा गाएँ जग में, तेरी लीला कल्याणी।
नवरात्रि का पावन पर्व, लाए मंगल प्रकाश,
माँ के चरणों में अर्पित है, श्रद्धा और विश्वास।
रचनाकार-पल्लवी श्रीवास्तव
ममरखा, अरेराज
पूर्वी चम्पारण, (बिहार)


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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