(बाल कविता)
लालच सबसे बुरी बला
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लालच सबसे बुरी बला ।
इससे होता नहीं भला ।।
सदा परिश्रम जो करता ।
खुशी मगन से वह रहता ।।
चैन वही पाता जिसने
कभी किसी को नहीं छला ।
लालच सबसे बुरी बला ।।
मेहनत करके जो खाता
सुख का मोती वह पाता
लक्ष्य वही पाता अपना
लगातार जो सदा चला ।
लालच सबसे बुरी बला ।।
छीन-झपट कर जो लाता
दुख के काँटें वह पाता
स्वीकार करो रूखा-सूखा
ईश्वर से जो सदा मिला ।
लालच सबसे बुरी बला ।।
सीधी सच्ची राह पकड़
कभी किसी से नहीं झगड़
प्रेम भाव से रहने वाले
का नंबर होता पहला।
लालच सबसे बुरी बला ।।
नीति नियम से सदा चलो
हरदम फूलो और फलो
तम को हरने की खातिर
उज्ज्वल दीपक स्वयं जला ।
लालच सबसे बुरी बला । ।
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~राम नरेश 'उज्ज्वल'


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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