(बाल कविता)
चूहों से सबकी कुट्टी
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एक रेत का बड़ा महल ।
रहती उसमें चहल पहल ।।
मछली घर उसके अंदर,
उछल-कूद करते बन्दर ।
गौरैया तोता तीतर,
रहते सब उसके भीतर ।
नौकर चाकर थे सारे,
टिम टिम करते थे तारे ।
सूरज चांद बहुत सुंदर,
शीतल हवा बहे अन्दर ।
झींगुर भी थे मस्त पड़े,
मच्छर भी थे व्यस्त बड़े ।
चूहे भी आकर ठहरे,
खोदे बिल गहरे-गहरे ।
मच्छर ने उनको डांटा,
झींगुर ने मारा चांटा ।
हवा ने उनको फटकारा,
नदी ने छोड़ी जल धारा ।
सबने जब तकरार किया,
पानी ने तब वार किया ।
हुआ अचानक तब खतरा,
फौरन नीचे महल गिरा ।
भागे जीव जन्तु सारे,
थोड़े बहुत गए मारे ।
महल हुआ पूरा मिट्टी,
चूहों से सबकी कुट्टी ।
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~राम नरेश 'उज्ज्वल'


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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