वो कहते है ना की अमर प्रेम की गाथा कृष्ण और राधा.... 🙏🏻🙏🏻
अत्यंत भाव भक्ति से भरी जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए इस प्यार की एक बहुत कम सुनी हुई सच्चाई की और प्रयाण करते हुए दिल को छूने वाली, प्यार की संवेदनाओं को उसमें होने वाली फ़िक्र एकदूजे प्रति समर्पण और त्याग की जैसे आंधी....हां आंधी इसलिए की आंधी जब आती हैं तो रुद्र स्वरूप में सब फ़ना हो जाता है और निशानी का प्रतीक पीछे छोड़ जाता है वैसे ही राधा रानी की असीम प्रीत गिरधारी के लिए इस कहानी में छिपी प्यार स्नेह रूपी गरिमा,अविनाशी आंधी से कम नहीं है,!
कान्हा छोटा था तब गोकुल में अनेकों खेल खेलता, अपनी लीलाओं से मनमोहित करता और गैया चराने दूर दूर तक जाता, तब खुले पैर इधर उधर भागता रहता जो राधा देखती और उनकी फिक्र करती क्योंकि रास्तो में बड़े बड़े कांटे और कंकण पड़े रहते और कान्हा बिन देखे अपने कोमल पाँवों से बस भागता रहता, और हाँ... जिस बात से मैं सभी को अवगत कराना चाहती हूँ ये वहीं समर्पण त्याग और न्यौछावर की अदम्य भावनाओं से सजी आकर्षक प्रस्तुति करते हुए मैं भावविभोर हो रही हूँ..!!
भगवान श्री कृष्ण के बाएँ पैर में कमल याने पद्म का निशान हैं जो कैसे आया... और..उसके पीछे का रहस्य एवं राधा का त्याग और बलिदान से भरा अत्यंत प्यार, स्नेह छिपा हुआ है जो दर्शाता है की प्यार पाना नहीं बल्कि लूटना और लूंट कर अमर हो जाना है, श्री कृष्णा की ये रहस्यम कथा जो पौराणिक कथा अनुसार भगवान श्री कृष्ण के बाएँ पाँव के तलवे में सौलह चित्र है,इसी में एक कमल के फूल का है वो कैसे बना... इसी का वृतांत करते है कि कृष्ण जब खुले पैर से भागते और चलते तो राधा को उनकी विंता सताती और वो हमेशा उनके आसपास उनका ध्यान रखा करती थी, एक दिन मुरलीधर ऐसे ही मदमस्त हुए धुन छेड़ रहे थे घने वृक्ष की छांव में तब वहां बड़े बड़े नुकीले काँटे पड़े थे जो उनके नज़र में पड़े ही नहीं थे और राधा को अंदाजा हो गया था की ये कांटों पर कान्हा अपना पांव रख देगा, इसी लिए जब कान्हा अपना पाँव रखने जाता हैं, बड़ी ही सावधानी से राधा अपने दोनों हाथों की हथेली रख देती हैं और भगवान अपना पैर हथेली पर रख देते है और आश्चर्य चकित होते हुए कहते है की राधा ये क्या... तूने अपने कोमल हाथ रख दिए ... मेरी रक्षा के लिए...और काँटों के घाव से अपने हाथों को घायल कर लिया तुम मेरी इतनी फिक्र और ऐसी अनहद चाहत हमारे प्रति रखती हो, बस तब से श्री कृष्ण ने वो प्रतिक बाएँ पाँव में कमल के चिन्ह के रूप मे स्थापित कर लिया ..! जो राधा के हाथों का निशान है,जो राधिका का पावन पवित्र प्यार का अमर निशान हैं, इस जन्माष्टमी में ये छोटी लेकिन अमर कहानी की अद्भुत गाथा और अनुभूति की सर्वोत्तम फुलो से भी मृदु, सागर की लहरों पे चलने वाली लुप्त हवा जैसे, बरखा से उत्पन्न होने वाले ओस और नैनों की नमी की भिनास नित्य यहीं बहाव में बस निरंतर बह रही है, आदि अनादि काल से,आदित्य अमी रस भरी अमृतमय अमर गाथा जो अनंत काल से अनंत तक सदाबहार रहेगी ।।
अस्तु...!!
जय श्री राधेय 🙏🏻🙏🏻🌹🌹


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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