जीवन की कुछ कहानियाँ ऐसी भी होती हैं
जो किसी से कही नहीं जाती,
न ही कही जा सकती है।
जिन्हें न कोई समझ सकता है
और न ही किसी को समझाया जा सकता है।
एक राज़ बनकर रह जाती हैं
कहीं दिल की गहराइयों में।
समय बीतता चला जाता है,
वो राज़ बनकर दफ़न होते चले जाते हैं।
ज़िम्मेदारियों की आड़ में
सांसों का सफ़र मौसम की तरह
गुज़रता चला जाता है।
उम्र का एक पड़ाव ऐसा आता है,
जब सब ज़िम्मेदारियाँ ख़त्म हो जाती हैं।
तब वही बीते लम्हें
एक बार फिर जिन्दा हो जाते हैं,
बारिशों में चमकते जुगनुओं से।
वही दफ़न राज़
भावनाओं को जगाने लगते हैं,
यादों के झरोखों से
बाहर आने लगते है।
उस पल में हम सोचते हैं
ज़िम्मेदारियों ने हमारी उलझनों को सुलझाए रखा।
अगर हम अपने आप से रूबुरू हुए होते,
तो शायद जी ही नहीं पाते॥
वन्दना सूद
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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