उसने कभी भी, कभी कभी
अपने पर हुए, जुल्मों का
ज़िक्र तक नहीं किया
गालों पर उभरी
पांच उंगलियों के
लाल निशान को
हमेशा, पल्लू से छिपाया
आंखों से निकलती
वेदना सागर की लहरों को
हृदय की साहसाग्नि से
सोख सोखकर
अमृत मोती बना दिया
तानों, अपशब्दों की
लड़ियों को गुथ गुंथकर
मन कंठ में
माले की तरह सजा लिया
आंखों से, होटों से
अपनी कर्मभाव से
ब्यथा कथा,तनिक भी
प्रकट नहीं किया
क्या इसीलिए, ये
पुरूष प्रधान समाज, उसे,
अबला कहती है??
अगर हां, तो,लानत है,
उसके अंदर
अनंत पीरसागर को
अपने अंजलि में लेकर
पी लेने का
अतुल,असीम, अकल्पनीय
शक्ति विराजित है
इसीलिए,वह, शक्ति स्वरूपा
नारी शक्ति है, नारी शक्ति है।।
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







