मेरे थोड़े से दूर जाने पर रोने लगा था,
क्या कहूं...वक्त ने ऐसा खेल रचा था,
चाहकर भी ना रुक पाई उसके पास मैं,
न चाहकर भी मुझे जाओ कहने लगा था,
ये कैसा मिलन कराया था हमारा ईश्वर,
मत जा यहां से बारिश भी कहने लगा था,
उसकी कांपती हुई होठ भी बोल न पाई,
ये आँखें भी इस पल कैद करने लगा था,
इतनी बारिश में सुप्रिया मिलने तो आई,
ये सोच कर वो शख्स मुस्कुराने लगा था...।।
- सुप्रिया साहू


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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