मोहब्बत तो करता हूँ अपने ख्वाब से।
मगर तुम चाहती हो अपने हिसाब से।।
आईना देखना सजना संवरना रिझाना।
आ गया बखूबी तुमको किस हिसाब से।।
ज्यादा मोहब्बत से डर लगने लगा मुझे।
आँखें नम हो जाती उफनते तालाब से।।
दूर जाकर पत्थर न हो जाए दिल मेरा।
उस ख्याल से तपन बढ़ रही जबाव से।।
किस तरह 'उपदेश' राज खुल रहा मेरा।
मैं भी जानने लगा हूँ पढ़कर किताब से।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







