विषय - मेरा शहर
विधा- गीत
रचनाकार सुनील कुमार खुराना नकुड़ सहारनपुर उत्तर प्रदेश भारत
प्यारा मेरा शहर हो ऐसा,
मेरे सपनों में होता जैसा।
छल-कपट ना हो जिसमें,
जिसमें देवतुल्य हो किस्में,
सबमें भाव होएं देव जैसा।
सब मानवता की बात करें,
सब जन सबके दुख को हरे,
साथ दें सब जन एक जैसा।
उच्च नीच न हो उसमें कोई,
रुह किसी की नहीं हो सोई,
करें न कोई जैसे के साथ तैसा।
सत् की डगर पर सब चलें,
सुबह शाम सब मिलें गलें,
हरिश्चंद्र सा जीवन हो जैसा।
भाई भाई में हो सदा प्यार,
नर और नारी में नहीं हो हार,
प्रेम हो जहां राम,भरत जैसा।
सबकी बेटी हो अपनी बहना,
प्यार से ही सबके संग रहना,
रिश्ता हनुमान संग सीता जैसा।
मेरे शहर में संविधान भी होएं,
मंगल की बातों का बीज बोएं,
कानून ना खरीदें जिसपे हो पैसा।
स्वरचित और मौलिक गीत
सर्वाधिकार सुरक्षित
सुनील कुमार खुराना
नकुड सहारनपुर
उत्तर प्रदेश भारत


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