प्रिय तुम अच्छे हो,
सचमुच में सच्चे हो,
बातों में तुम्हारे कोई गिरावट नहीं है,
गिर गया मैं,
पर उलझन की कोई आहट नहीं है,
सिकुड़ कर सिमट गई तन्हाई,
पास नहीं आई कोई बेवफ़ाई,
तुम मुझे साथ में ऐसे रखते हो,
जैसे पलकों पर हृदय के शुद्ध आँसू रखते हो,
क्या करूं कि प्रिय तुम पास रहो,
या जीवन जीने के इशारें करते रहो,
दोनों के बीच से गुजरने को रास्ता करते रहो।।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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