Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

तुम कुछ तो मेरे जैसी हो

तुम कुछ तो मेरे जैसी हो,
पर पूरी नहीं हो जाना....
कहते हैं कहने वाले,
सिर्फ़ मेरा ही अफ़साना।

हदें ना छोड़ेंगे अपनी,
यही है अपना वादा।
सबसे परे कुछ नया करेंगे,
यही है बस एक इरादा।

तुम कुछ तो मेरे जैसी हो
पर पूरी नहीं हो जाना....
लिखेंगे कई लिखने वाले,
एक दिन मेरा फ़साना।

बयां करेंगे ग़ज़लों में अपनी
ये मेरी खुशी का ठिकाना।
कामयाबी कदम चूमेगी,
और ये जहां देगा नज़राना।

✍️ रीना कुमारी प्रजापत ✍️


यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है


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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (7)

+

Shiv Charan Dass said

वाह वाह

रीना कुमारी प्रजापत 'मनस्वी' replied

🙏 धन्यवाद जी

वन्दना सूद said

बहुत शानदार रचना 👌👌

रीना कुमारी प्रजापत 'मनस्वी' replied

😊🙏🙏

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

वाह रीना जी, कामयाबी आपकी कदम चूमे ये दुआ है हमारा नजराना।

रीना कुमारी प्रजापत 'मनस्वी' replied

Thank you ji😊🙏

कमलकांत घिरी said

ज़रूर दीदी जी एक दिन कामयाबी आपके कदम ज़रूर चूमेगी, बेहद शानदार रचना 👌🙌👏💐 प्रणाम शुभरात्रि🙏

रीना कुमारी प्रजापत 'मनस्वी' replied

शुक्रिया 😊😊

सुप्रिया साहू said

बहुत खूबसूरत एवं लाज़वाब रचना दास 👌👌, जरूर लिखेंगे मैम आपका भी फसाना😊, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

रीना कुमारी प्रजापत 'मनस्वी' replied

Ji shukriya Supriya ji 🙏😊

श्रेयसी said

बहुत ख़ूब 👌👌

रीना कुमारी प्रजापत 'मनस्वी' replied

😊🙏🙏

अशोक कुमार पचौरी 'आर्द्र' said

'तुम कुछ तो मेरे जैसी हो, पर पूरी नहीं हो जाना' — इस एक पंक्ति में गहराई छिपी है पहचान की, अलगाव की और अपनी विशिष्टता बनाए रखने की - Bahut hi Laazwaab "बहुत ही सुंदर और आत्मीय रचना! - सादर प्रणाम

रीना कुमारी प्रजापत 'मनस्वी' replied

Ji wo kuch mere jaisi hai par puri nhi hai.... दिल की गहराइयों से बहुत बहुत शुक्रिया आपका 🙏🙏 प्रणाम

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